Wednesday, November 25, 2020

आतंकी सुरक्षों बलों को दुश्मन के रूप में देखते हैं : दुलत

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नई दिल्ली, 25 नवंबर (आईएएनएस)। पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर में हाल ही में रक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़ा दिए हैं क्योंकि वे सुरक्षा बलों को दुश्मन के रूप में देखते हैं और यह भी कि वे अब नागरिकों को टारगेट नहीं करना चाहते हैं। रिसर्च और एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख ए.एस. दुलत ने ये बात कही है।

पिछले चार वर्षों में भारत में सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर कई हमले हुए हैं। 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आत्मघाती हमलावर द्वारा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। जैश-ए-मोहम्मद के आदिल अहमद डार के रूप में पहचाने गए आत्मघाती हमलावर ने अपने वाहन को सीआरपीएफ के काफिले में घुसा दिया था।

18 सितंबर, 2016 को, पाकिस्तान स्थित हथियारबंद आतंकवादियों ने श्रीनगर से लगभग 102 किलोमीटर दूर उरी में भारतीय सेना के अड्डे में प्रवेश किया जिसमें 18 सैनिक मारे गए।

2 जनवरी 2016 को, भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने पंजाब के अति सुरक्षित पठानकोट वायु सेना अड्डे में प्रवेश किया और गोलीबारी की, जिसमें 7 सुरक्षाकर्मी मारे गए।

दुलत ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में हर दिन कोई न कोई घटना घटती है, लेकिन चूंकि यह जम्मू-कश्मीर में होती है, इसलिए कोई इसे नोटिस नहीं लेता। अगर यही हमला दिल्ली, मुंबई या कोलकाता में होता है, तो मीडिया इसे और भी ज्यादा नोटिस लेगा।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद समाप्त नहीं हुआ है। वहां ऐसा होता रहता है। हर चार से पांच दिनों में कोई न कोई आतंकवादी मारा जाता है या सुरक्षाकर्मी अपनी जान गंवा देते हैं।

घाटी में रक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले के कारणों का हवाला देते हुए, दुलत ने कहा कि जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद हमेशा से रहा है। उन्होंने कहा, अब अगर रक्षा प्रतिष्ठानों को दो कारणों से चुना जा रहा है, तो एक यह है कि सुरक्षा प्रतिष्ठानों को एक खलनायक के रूप में देखा जाता है और दूसरा कारण नागरिकों को मारना नहीं है।

भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख ने कहा कि पहले नागरिक भी मारे जाते थे। समय के साथ नागरिकों की हत्याएं कम हुई हैं। लेकिन अगर आतंकवादी सीआरपीएफ के बंकर पर ग्रेनेड फेंकते तो नागरिक भी मारे जा सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जम्मू-कश्मीर का मसला हल नहीं होगा तब तक ऐसा होता रहेगा। दुनिया में कहीं भी ऐसा नहीं हुआ है कि उग्रवाद बंदूक की ताकत से हल किया गया हो। आपको हमेशा लोगों से बात करनी होगी।

उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि दिल्ली कुछ चाहती है और वहां के लोग कुछ और चाहते हैं और इस वजह से एक बड़ा अंतर है और कोई भी इस अंतर को भरना नहीं चाहता है। उन्होंने कहा, मेरा विनम्र विचार है कि केवल बातचीत से जम्मू और कश्मीर में उग्रवाद का समाधान हो सकता है।

एसकेपी



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Terrorists see security forces as enemies: Dulat
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