डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र की श्रम इकाई अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (ILO) के अनुसार, अप्रैल से जून के दौरान महज तीन महीने में ही करीब 30.5 करोड़ लोगों की पूर्णकालिक नौकरियां समाप्त हो सकती हैं। ILO ने कहा कि 43 करोड़ से ज्यादा उद्यम बेहद प्रभावित हैं जिसमें खुदरा और उत्पादन वाले क्षेत्र शामिल हैं। दुनिया भर में करीब 3.3 अरब श्रमिक हैं। करीब दो अरब नौकरियां असंगठित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्र में हैं और ये ऐसे श्रमिक हैं जिनकी नौकरियां जाने का सबसे ज्यादा खतरा है।
एजेंसी ने कहा कि COVID-19 महामारी की वजह से आर्थिक गिरावट से असंगठित क्षेत्र के 1.6 अरब लोगों के सामने आजीविका कमाने का संकट खड़ा हो गया है। ILO के अनुसार बंद और बेहद प्रभावित क्षेत्रों में काम करने वाले ऐसे श्रमिकों की आय में बंद के पहले महीने में वैश्विक स्तर पर 60 फीसद की गिरावट हुई है। आईएलओ के महानिदेशक गाय रेडर ने कहा कि महामारी और नौकरियों के संकट की वजह से इन श्रमिकों की आजीविका को सुरक्षित करना बेहद जरूरी हो गया है।
उन्होंने कहा कि लाखों श्रमिकों के लिए कमाई नहीं होने का मतलब भोजन का जरिया का खत्म होना है और उनका भविष्य डूब जाएगा। दुनिया भर में लाखों कारोबार दम तोड़ने को हैं। रेडर ने कहा कि लाखों श्रमिकों के लिए अगर आय नहीं है तो इसका मतलब उनके लिए न तो भोजन, न सुरक्षा और न ही उनका कोई भविष्य है। दुनिया भर में लाखों व्यवसाय मुश्किल में हैं। उनके पास कोई बचत नहीं है न ही कोई कर्ज बचा है।
ILO के मुताबिक, अफ्रीका और अमेरिका में 80 फीसद से अधिक गिरावट, यूरोप और मध्य एशिया में 70 फीसद और एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 21.6 फीसद गिरावट देखी गई है।
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