भोपाल, 17 मार्च (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में सियासी उठापटक का दौर जारी है। कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफा देने से जहां कमल नाथ सरकार पर संकट गहराया हुआ है तो दूसरी ओर भाजपा के विधायक नारायण त्रिपाठी भी बगावती तेवर अपनाए हुए है। वे मुख्यमंत्री कमल नाथ के संपर्क में है।
राज्य में भाजपा लगातार कमल नाथ सरकार के अल्पमत में होने की बात कहे जा रही है, वहीं उसके एक विधायक नारायण त्रिपाठी सवाल खड़े कर रहे है। त्रिपाठी सोमवार को राजभवन जाने वाले भाजपा के विधायकों के दल के साथ नहीं गए थे, दूसरी ओर वे राजधानी से बाहर होटल में ठहराए गए विधायकों के साथ भी नहीं है।
त्रिपाठी ने सोमवार को दिन और रात में मुख्यमंत्री कमल नाथ से मुलाकात की। त्रिपाठी सीधे तौर पर भाजपा का साथ छोड़ने की बात नहीं कह रहे है, मगर कमल नाथ सरकार को विकास का काम करने वाली सरकार बताते आ रहे हैं। वे बेंगलुरु ले जाए गए विधायकों को बंधक बनाने की बात कह चुके हैं।
राज्य के विधायकों की स्थिति को देखें तो पता चलता है कि 230 विधायकों वाले सदन में दो स्थान रिक्त है, छह का इस्तीफा मंजूर किया जा चुका है। कांग्रेस के 108 विधायकों में से 16 के इस्तीफे विधानसभाध्यक्ष के पास लंबित है, इस तरह कांग्रेस के विधायकों की संख्या 92 रह जाती है। वहीं भाजपा के 107, बसपा दो, सपा का एक और चार निर्दलीय विधायक हैं।
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