Friday, February 28, 2020

राज्यों की आबादी के आधार पर अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर केंद्र को नोटिस

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नई दिल्ली, 28 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका पर शुक्रवार को केंद्र को नोटिस जारी किया, जिसमें राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक की पहचान के लिए दिशा निर्देश तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

मुख्य न्यायाधीश डी.एन.पटेल और सी. हरिशंकर ने अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा। इस याचिका में अल्पसंख्यक शब्द को परिभाषित करने के लिए दिशा-निर्देश देने और हर राज्य की आबादी के आधार पर एक विशेष समुदाय को अल्पसंख्यक दर्जा के लिए दिशा निर्देश तैयार करने पर जोर दिया गया है।

मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी।

याचिका में 2011 की जनगणना का हवाला दिया गया है जिसमें कहा गया है कि लद्दाख में हिंदू केवल एक फीसदी, मिजोरम में 2.75 फीसदी, लक्षद्वीप में 2.77 फीसदी, कश्मीर में 4 फीसदी, नगालैंड में 8.74 फीसदी, मेघालय में 11.52 फीसदी, अरुणाचल प्रदेश में 29 फीसदी, पंजाब में 38.49 फीसदी और मणिपुर में 41.29 फीसदी हैं।

इसमें कहा गया, लेकिन उनके अल्पसंख्यक अधिकारों को गैरकानूनी और मनमाने ढंग से बहुसंख्यक आबादी के लिए छीना जा रहा है, क्योंकि न तो केंद्र और न ही संबंधित राज्य ने उन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2 (सी) के तहत अल्पसंख्यक के रूप में अधिसूचित किया है।

याचिका में कहा गया कि इस तरह से हिंदुओं को उनके मूल अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जिसकी अनुच्छेद 30 के तहत गारंटी दी गई है।



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Notice to Center regarding minority status on the basis of population of states
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