डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महात्मा गांधीजी आमतौर पर पूरा दिन उनके पत्राचार में भाग लेने, लोगों से बात करने, उनके चरखे की कशीदाकारी और अपने मध्याह्न भोजन लेने में बिताते थे। वे जहां रहते थे वहां एक बालकनी भी थी, जो पूरी तरह से कांच के दरवाजों से घिरी हुई थी, उस कमरे से सटी हुई जहां वह कालीन पर फर्श पर रातों को सोते थे। शुक्रवार, 30 जनवरी 1948, किसी अन्य दिन की तरह। किसी को पता भी नहीं था के क्या होने वाला है? गांधीजी सुबह 3.30 बजे अपनी प्रार्थना के लिए हमेशा की तरह उठे और आगे क्या हुआ यह जानने के लिए NEWJ के वीडियो को पूरा देखें...
.Download Dainik Bhaskar Hindi App for Latest Hindi News.
from दैनिक भास्कर हिंदी https://ift.tt/318a8f7
.
No comments:
Post a Comment